रविवार, 28 जुलाई 2019

मेरी चुदाई एक अनजान बूढ़े से - सत्या भाग १

हैलो दोस्तों, मेरा नाम सत्या है और आज मैं आपके सामने अपनी सच्ची कहानी बताने जा रही हूं। जो अंजाने में हुई थी लेकिन मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी यादों में से एक है। तो चलिए दोस्तों कहानी शुरू करते हैं। दोस्तों अभी मेरी उम्र ३५ साल है और में शादी शुदा औरत हूं। मेरी हाइट ५'४ है।

दोस्तों बात उस समय की है जब मै १९ साल की थी, और मेरी जवानी अपने चरम पर थी। मेरा रंग एकदम गोरा और स्किन चिकनी थी, मेरे बूब्स का साइज ३२ था और मेरे बूब्स बिल्कुल गोल चिकने और चमकदार थे, मेरी कमर पतली और गान्ड उभरी हुई थी जिसके कारण वह एकदम अलग से नज़र आती थी। मेरा चेहरा एकदम श्रद्धा कपूर की तरह दिखता था, मेरे कॉलेज में सब मुझे श्रद्धा कपूर कहते थे। लगभग हर कोई मुझपर गंदी नज़र रखता था, और में सिर्फ इसका मज़ा लेती थी लेकिन चुदाई के बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता था, और मैं इस बारे में सोचती भी नहीं थी।अभी तक मैने किसी भी लड़के को अपनी जवानी और चूत को छूने भी नहीं दिया था, लेकिन एक दिन बिना कुछ सोचे ही मेरी जवानी लूट ली गई, और वो भी एक बूढ़े आदमी के द्वारा।
दोस्तों मेरा कॉलेज मेरे गांव से १२ किलोमीटर दूर था और मै स्कूटी से जाती थी। मेरे साथ मेरी एक सहेली भी जाती थी लेकिन उस दिन वह कॉलेज नहीं गई थी। और मौसम खराब होने के कारण मुझे भी जल्दी घर पहुंचना था। इसलिए मै १२ बजे ही कॉलेज से निकल गई ताकि बारिश के पहले अपने घर पहुंच जाऊं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रास्ते में तेज बारिश और तूफान शुरू हो गया। में पूरी भीग गई थी लेकिन मै गाड़ी चलाती रही क्यूकी रास्ते में जंगली एरिया था वहां मुश्किल से कोई घर थे। अब तूफान इतना बढ़ गया कि स्कूटी चलाना मुश्किल हो गया। तभी सामने मुझे एक चाय की दुकान दिखी मैने अपनी स्कूटी खड़ी कर दी और दुकान के अंदर चली गई। उसके अलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। अंदर मैने देखा कि दुकान पर कोई नहीं था, वहां एक छोटा सा चाय का स्टॉल था और अंदर एक कमरा था वो भी कच्चा था,पानी और तूफान अंदर तक आ रहा था, तभी अंदर से आवाज़ आई-"यहां अंदर आ जाओ बेटी वहां भीग जाओगी।"

बुजुर्ग की आवाज़ सुनकर मुझे लगा कि चलो बेटी कहा है और बुजुर्ग आदमी है, ये सोचकर मै अंदर चली गई। अंदर एक चारपाई थी बस उसपर वो आदमी लेटा हुआ था। उसकी उम्र लगभग ६५ साल थी और चेहरे पर सफेद दाढ़ी थी, उसने बनियान और सफेद धोती पहन रखी थी। बैठने के लिए कुछ और नहीं था तो उसने मुझे इशारा किया कि यहीं चारपाई पर बैठ जाओ। मै बैठ गई। अब में उसकी कमर के पास बैठी थी और वह मेरी तरफ मुंह करके लेटा था, मै बाहर देख रही थी कि कब पानी रुके और मैं जाऊं, लेकिन तूफान और पानी दोनों बहुत तेज़ थे, अंधेरा सा छा गया था दिन में, ऊपर से मै पूरी गीली थी, मेरा सूट मेरे शरीर se चिपक गया था, काले सूट में मेरी गोरी चिकनी चमड़ी और भी चमकदार दिख रही थी। हमारे बीच कोई बात नही हुई थी अभी तक।
मै अपने ख़यालो में खोई हुई थी कि कैसे घर जाऊंगी अब। ऊपर से मेरा फोन भी स्कूटी की डिक्की में था।
    तभी मुझे अपनी कमर के पास कुछ महसूस हुआ, मै एकदम सकपका गई, ध्यान दिया तो देखा कि बूढ़ा आदमी मेरे पास खिसक आया था और उसका कमर वाला हिस्सा मुझसे टच हो रहा था। थोड़ी ही देर में उसका लंड मुझे गड़ने लगा। शायद मेरे स्पर्श से उसका लंड खड़ा होने लगा था। अभी में कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं थी। मैने उस पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन इस बार मुझे अचानक जोर से करेंट सा लगा क्युकी उसका हाथ मेरी गीली जांघ पर था। मै बिल्कुल स्थिर हो गई। शायद इसकी हिम्मत इसीलिए बढ़ रही थी क्युकी मै कुछ भी नहीं कर रही थी। तभी उसने एक और कदम बढ़ा दिया मेरी जवानी को लूटने के लिए। इस बार उसने अपने दोनों हाथों को मेरी कमर के पास से डालकर मुझसे चिपकने लगा । वो अभी भी लेटा हुआ था और मुझे उसका लंड अपनी कमर के पास महसूस हो रहा था।
मेरे लिए यह अनुभव पहली बार था तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। अब उसकी हिम्मत और बढ़ गई और अब वह उठकर बैठ गया।

अब वह मेरे पीछे से दोनों पैर दोनों तरफ डालकर बैठ गया, अब उसके दोनों हाथ मेरे दोनों गोल चूची पर थे और उसका सीना मेरी पीठ से चिपका हुआ था, उसने अपना मुंह मेरे कान के पास लगाकर चाटना और चूमना शुरू कर दिया।


मुझे अब मज़ा आने लगा था। पहली बार कोई मेरे दूध दबा रहा था और मुझे चूम रहा था। मैने आंखे बंद कर ली और मदहोशी में खोने लगी। तभी उसने मुझे उठाया और अपनी गोद में बिठा लिया और अपने पैर नीचे लटका कर बैठ गया अब में उसकी गोद में थी और मेरा एक हाथ उसके गले में था और उसका मुंह मेरी चूची के ऊपर था।

 अब उसने मुझे खड़ा किया और मेरा सूट उतारने कहा शरम के मारे मैने माना कर दिया लेकिन इस बार उसने गुस्से में कहा  -"कपड़े उतार मादरचोद"।

पहली बार किसीने मुझसे ऐसी बात की थी, मेरी आंखो से आंसू आ गए अब मै सोच रही थी कि कहा फस गई और अब क्या होगा।
उसने फिर चिल्लाया " कपड़े उतार ना रण्डी या मै फाड़ दू।"

शायद मेरी चुप्पी से उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और अब वह मुझे गंदी गालियां देकर बात करने लगा था।

तभी वह एकदम से खड़ा हो गया , उसने अपनी बनियान उतार दी। उसके सीने पर भी सफेद बाल थे। पहली बार एक आदमी आधा नंगा मेरे सामने खड़ा था। मै कुछ सोच पाती उससे पहले ही उसने अपनी धोती भी उतार दी।

मै एकदम स्तब्ध थी दोस्तों मै उसे देखती रह गई वह पूरा नंगा मेरे सामने खड़ा था। उसका लंड ७ इंच लम्बा झूल रहा था जैसे कोई काला सांप पेड़ से लटकता है। मुझे अचानक वह बूढ़ा बहुत अच्छा लगने लगा था।

वह आगे बढ़कर मुझ से पीछे से चिपक गया। अब मेरी उभरी हुई गान्ड पर उसका बूढ़ा लंड बहुत अच्छे से महसूस हो रहा था। उसके दोनों हाथ मेरे दोनों गोल चूची पर थे और वह मुझे बेतहाशा चूम रहा था गले में और कान के पास । अब उसने मेरा सूट उतारना शुरू किया। मैने बिना किसी विरोध के हाथ उठा दिए और उसने आराम से मेरा गीला सूट उतार दिया। अब मै काली ब्रा और काले पजामे में उसके सामने आधी नंगी खड़ थी।


मेरा गोरा बदन गीला था जिसके कारण और भी ज्यादा चमकदार और आकर्षक लग रही थी। मेरे गोल कसे हुए मम्मे एकदम सुंदर लग रहे थे। मै जिसे चोदने की इच्छा मेरे पूरे रिश्तेदरों और कॉलेज की थी, वो लड़की आज एक अनजान बूढ़े के सामने आधी नंगी खड़ी थी। और उसकी किस्मत देखो गंदा सा बूढ़ा आदमी इतनी हसीन कमसिन लड़की को चूम रहा था।

शेष अगले भाग में-


दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी है अभी मुझे काम है तो इसका अगला भाग शाम को लिखूंगी की किस तरह मेरी मदमस्त जवानी को एक अनजान बूढ़े ने लुटा। अगर आपको कहानी पसंद आई हो तो प्लीज मुझे फ़ॉलो करें और इस कहानी को शेयर करें। और कमेंट में मुझे बताइए क्या लगा आपको।
धन्यवाद