नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अमित है और मै यूपी के कानपुर शहर से हूं। मेरी उम्र २७ साल है। आज इस ब्लॉग के माध्यम से मै आपके सामने अपनी सच्ची कहानी का भाग २ बताने जा रहा हूं। दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी है, उम्मीद है आप को पसंद आएगी। आइए कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
तो दोस्तों मै परेशान था कि भाभी आजकल मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हैं, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरी परेशानी दूर हो गई और मुझे मेरा पहला प्यार मिल गया पूरी तरह से।
हुआ यूं कि उस दिन मै अपने कमरे में भाभी के नाम की मुठ मारकर उदास बैठा था तभी मम्मी की आवाज़ आई।
मम्मी-"अमित रचना बीमार है और रवि बाहर है, उसका फोन आया है,जा बेटा भाभी को डॉक्टर को दिखा ला।"
मेरी तो जैसे मन्नत पूरी हो गई थी। मै जल्दी से तैयार हुआ और भाभी के पास जाने के लिए निकल गया। बाहर देखा तो बहुत तेज़ पानी गिर रहा था।
मै पानी में से ही भाभी के घर पहुंच गया, मै थोड़ा सा गीला हो गया था। वहां पहुंचा तो भाभी ने दरवाज़ा खोला और बोली अरे अमित तुम तो बिल्कुल गीले हो गए हो।
रुको मैं टॉवेल लाती हूं।
मैने पूछा आप तो बीमार थी ना चलिए डाक्टर को दिखा दू आपको।
भाभी-" नहीं अब मै थोड़ी ठीक हूं, तुम आ गए हो अब मै बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी।"
अब मैने गौर किया भाभी पर, वो कयामत लग रही थी दोस्तों।
उनका गोरा बदन, लाल गाउन में और प्यारा लग रहा था।
गाउन का गला बड़ा था जिसमें से उनके बड़े बड़े गोल बूब्स की दरार बिल्कुल साफ दिख रही थी। उनके लंबे पैर और कसा हुआ गाउन उनको और सेक्सी बना रहा था। ऊपर से उभरी हुई गान्ड साफ नज़र आ रही थी जो मुझे अनायास ही बेचैन करने लगी। मै उनको देखने में इतना खो गया कि पता ही नहीं चला कि भाभी मुझे ही देख रही थी।
भाभी-" अमित, अभी जी भरके देख लेना बाबू, पहले टॉवेल से पोंछ लो, सर्दी हो जाएगी।"
भाभी के मुंह से बाबू सुनकर तो जैसे मुझे नशा सा हो गया। मुझे कुछ होश नहीं था। तभी भाभी ने खुद मुझसे टॉवेल लेकर मेरा सर पोंछना शुरू कर दिया। अब भाभी मेरे बिल्कुल पास में खड़ी थी। उनके शरीर की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी।
तभी भाभी ने पूछा- "अमित मुझे पता है कि तुम मुझे बहुत पसंद करते हो। मुझे छुप कर देखते हो, क्या चाहते हो तुम मुझसे?"
आज बीमारी का बहाना बनाकर मैने तुम्हे इसलिए बुलाया था क्यों कि मुझे तुमसे जानना है क्या है तुम्हारे मन में?
मै एकदम सकपका गया कि नई भाभी मेरे मन में कुछ ग़लत नहीं है।
भाभी-"देखो अमित डरो मत, मै बुरा नहीं मानूंगी, जो भी है मुझसे बता दो, मै किसी से कुछ नहीं बताऊंगी।"
इतना सुनकर मुझ में हिम्मत आयी और मैने कहा भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, जबसे आपको देखा है मुझे आपसे प्यार हो गया है, आपको देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
ये सुनकर भाभी जोर से हंस दी। और बोली बताओ अच्छा क्या क्या अच्छा लगता है मेरा तुमको।
मैं -"भाभी आपकी स्माइल, आप की आंखे, आपका..... रहने दो आप बुरा मान जाओगी।
इतना कहकर मै रुक गया।"
भाभी -"आगे बोलो... आज जो बोलना हो बोल दो, जैसे बोलना हो बस बोल दो, तुम्हे आज सब छूट है।"
मैं-"भाभी आपका फिगर , आप के पैर,आपकी कमर मुझे बहुत अच्छी लगती है..... बस इतना ही देखा है, अंदर कुछ देखा नहीं.... इतना कहकर मै मुस्कुरा दिया.....
भाभी- " अच्छा जी, अंदर तक देखना चाहते हो तुम मुझे?"
भाभी के चेहरे पर एक नॉटी मुस्कान छा गई।
मैं सकपका गया। फिर भी मैने शर्मा कर मुंह नीचे कर लिया।
भाभी -" मैं तो सोच रही थी कि तुम्हारी इक्छा आज पूरी कर दी जाए, लेकिन तुम शायद मुझ में इंटरेस्टेड नहीं हो।"
अगर होते तो मुझे मना रहे होते कुछ दिखाने के लिए।
इतना सुनकर मुझ में हिम्मत बढ़ गई अब मैने खुलकर बोलना शुरू कर दिया।
मैं- "भाभी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं, मैंने जबसे आपको देखा है मैं आपका दीवाना हो गया हूं, मैं आपकी जवानी और सुंदरता का पूरा दर्शन करना चाहता हूं भाभी, बदले में आप जो बोलोगी करूंगा, प्लीज एक बार मुझे अपनी जवानी और सुंदरता के दर्शन करवा दो।"
भाभी -" अच्छा जी, मैं जो बोलूंगी वो करोगे तब तो आपको दिखाना ही पड़ेगा, लेकिन सिर्फ देखने मिलेगा कुछ करने की कोशिश मत करना"
भाभी के मुंह पर एक शैतानी मुस्कान थी।
मैने हां में सर हिला दिया।
अब मैं सोफे पर बैठ गया और भाभी सामने खड़ी हो गई।
शेष अगले भाग में -
दोस्तों कहानी का तीसरा भाग लेकर जल्दी आऊंगा। आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि अगर कहानी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों से शेयर कीजिए और ऐसी सच्ची कहानी के लिए हमें फॉलो करें।
धन्यवाद
तो दोस्तों मै परेशान था कि भाभी आजकल मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हैं, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरी परेशानी दूर हो गई और मुझे मेरा पहला प्यार मिल गया पूरी तरह से।
हुआ यूं कि उस दिन मै अपने कमरे में भाभी के नाम की मुठ मारकर उदास बैठा था तभी मम्मी की आवाज़ आई।
मम्मी-"अमित रचना बीमार है और रवि बाहर है, उसका फोन आया है,जा बेटा भाभी को डॉक्टर को दिखा ला।"
मेरी तो जैसे मन्नत पूरी हो गई थी। मै जल्दी से तैयार हुआ और भाभी के पास जाने के लिए निकल गया। बाहर देखा तो बहुत तेज़ पानी गिर रहा था।
मै पानी में से ही भाभी के घर पहुंच गया, मै थोड़ा सा गीला हो गया था। वहां पहुंचा तो भाभी ने दरवाज़ा खोला और बोली अरे अमित तुम तो बिल्कुल गीले हो गए हो।
रुको मैं टॉवेल लाती हूं।
मैने पूछा आप तो बीमार थी ना चलिए डाक्टर को दिखा दू आपको।
भाभी-" नहीं अब मै थोड़ी ठीक हूं, तुम आ गए हो अब मै बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी।"
अब मैने गौर किया भाभी पर, वो कयामत लग रही थी दोस्तों।
उनका गोरा बदन, लाल गाउन में और प्यारा लग रहा था।
गाउन का गला बड़ा था जिसमें से उनके बड़े बड़े गोल बूब्स की दरार बिल्कुल साफ दिख रही थी। उनके लंबे पैर और कसा हुआ गाउन उनको और सेक्सी बना रहा था। ऊपर से उभरी हुई गान्ड साफ नज़र आ रही थी जो मुझे अनायास ही बेचैन करने लगी। मै उनको देखने में इतना खो गया कि पता ही नहीं चला कि भाभी मुझे ही देख रही थी।
भाभी-" अमित, अभी जी भरके देख लेना बाबू, पहले टॉवेल से पोंछ लो, सर्दी हो जाएगी।"
भाभी के मुंह से बाबू सुनकर तो जैसे मुझे नशा सा हो गया। मुझे कुछ होश नहीं था। तभी भाभी ने खुद मुझसे टॉवेल लेकर मेरा सर पोंछना शुरू कर दिया। अब भाभी मेरे बिल्कुल पास में खड़ी थी। उनके शरीर की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी।
तभी भाभी ने पूछा- "अमित मुझे पता है कि तुम मुझे बहुत पसंद करते हो। मुझे छुप कर देखते हो, क्या चाहते हो तुम मुझसे?"
आज बीमारी का बहाना बनाकर मैने तुम्हे इसलिए बुलाया था क्यों कि मुझे तुमसे जानना है क्या है तुम्हारे मन में?
मै एकदम सकपका गया कि नई भाभी मेरे मन में कुछ ग़लत नहीं है।
भाभी-"देखो अमित डरो मत, मै बुरा नहीं मानूंगी, जो भी है मुझसे बता दो, मै किसी से कुछ नहीं बताऊंगी।"
इतना सुनकर मुझ में हिम्मत आयी और मैने कहा भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, जबसे आपको देखा है मुझे आपसे प्यार हो गया है, आपको देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
ये सुनकर भाभी जोर से हंस दी। और बोली बताओ अच्छा क्या क्या अच्छा लगता है मेरा तुमको।
मैं -"भाभी आपकी स्माइल, आप की आंखे, आपका..... रहने दो आप बुरा मान जाओगी।
इतना कहकर मै रुक गया।"
भाभी -"आगे बोलो... आज जो बोलना हो बोल दो, जैसे बोलना हो बस बोल दो, तुम्हे आज सब छूट है।"
मैं-"भाभी आपका फिगर , आप के पैर,आपकी कमर मुझे बहुत अच्छी लगती है..... बस इतना ही देखा है, अंदर कुछ देखा नहीं.... इतना कहकर मै मुस्कुरा दिया.....
भाभी- " अच्छा जी, अंदर तक देखना चाहते हो तुम मुझे?"
भाभी के चेहरे पर एक नॉटी मुस्कान छा गई।
मैं सकपका गया। फिर भी मैने शर्मा कर मुंह नीचे कर लिया।
भाभी -" मैं तो सोच रही थी कि तुम्हारी इक्छा आज पूरी कर दी जाए, लेकिन तुम शायद मुझ में इंटरेस्टेड नहीं हो।"
अगर होते तो मुझे मना रहे होते कुछ दिखाने के लिए।
इतना सुनकर मुझ में हिम्मत बढ़ गई अब मैने खुलकर बोलना शुरू कर दिया।
मैं- "भाभी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं, मैंने जबसे आपको देखा है मैं आपका दीवाना हो गया हूं, मैं आपकी जवानी और सुंदरता का पूरा दर्शन करना चाहता हूं भाभी, बदले में आप जो बोलोगी करूंगा, प्लीज एक बार मुझे अपनी जवानी और सुंदरता के दर्शन करवा दो।"
भाभी -" अच्छा जी, मैं जो बोलूंगी वो करोगे तब तो आपको दिखाना ही पड़ेगा, लेकिन सिर्फ देखने मिलेगा कुछ करने की कोशिश मत करना"
भाभी के मुंह पर एक शैतानी मुस्कान थी।
मैने हां में सर हिला दिया।
अब मैं सोफे पर बैठ गया और भाभी सामने खड़ी हो गई।
शेष अगले भाग में -
दोस्तों कहानी का तीसरा भाग लेकर जल्दी आऊंगा। आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि अगर कहानी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों से शेयर कीजिए और ऐसी सच्ची कहानी के लिए हमें फॉलो करें।
धन्यवाद