मंगलवार, 14 सितंबर 2021

मकान मालिक की कमसिन लड़की को चोदा -2

 हैलो दोस्तो, मैं अमित आपको अपने मकान मालिक की जवान लौंडिया की चुदाई की कहानी बता रहा था जिसका पहला भाग 

मकान मालिक की कमसिन लड़की को चोदा -1


आप पढ़ चुके होंगे।
जिन्होंने नहीं पढ़ा है उनके लिए संक्षिप्त में बता दूं कि मैं भोपाल में जॉब करने गया था और कमरा लेकर रह रहा था।

उस मकान के मालिक की बेटी करीना मुझसे गणित के सवाल हल करवाने आती थी। इसी दौरान हमारी सेटिंग हो गई और एक दिन मैंने उसको रात में अपने रूम पर बुला लिया।

हम दोनों ने एक दूसरे के होंठों को चूमा और मैंने उसका हाथ अपने खड़े लंड पर रखवा दिया। मैंने उसको चूत में लंड लेने की बात कही तो उसने मना कर दिया। फिर वो बोली कि मुझे थोड़ा टाइम दो और ये कहकर वो मेरे सीने पर लेट गई।

अब आगे की स्टोरी:

मेरा लंड तनाव में था और बार बार मेरे शॉर्ट्स में उछाल खा रहा था। बहुत मन कर रहा था कि करीना की चूत की गर्मी अपने लौड़े को चखा दूं लेकिन मैं उसके साथ किसी तरह की जबरदस्ती नहीं करना चाह रहा था।

वो मेरे सीने पर हाथ फिरा रही थी और मैं उसकी पीठ को सहला रहा था।
मेरे हाथ अब धीरे धीरे उसकी चूचियों को सहलाने लगे थे।

मैं जानता था कि वो अभी चुदने के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होगी इसलिए उसको मैं खुद ही चुदने पर मजबूर करना चाहता था।
करीना कुछ नहीं बोल रही थी।

मैंने उसकी दोनों नंगी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया।
फिर मैं धीरे धीरे चूचों पर दबाव बढ़ाने लगा, उसके दोनों मम्मों को प्यार से भींच रहा था, दबा रहा था।

वो भी इस हरकत का मजा ले रही थी।
उससे मैंने बोला- बेेेेबी तुम और कुछ नहीं तो मेरे हथियार पर हाथ तो रख ही सकती हो न ?
उसने कुछ जवाब नहीं दिया लेकिन अगले ही पल उसका हाथ मेरे कड़क लंड को सहला रहा था।

अब हम दोनों में वासना की मस्ती में भरने लगे थे। जब यौन अंगों को एक दूसरे के हाथों का स्पर्श मिलने लगे तो ज्यादा देर तक फिर किसी से रुका नहीं जाता है।

हम दोनों की हालत भी यही हो रही थी। मैं तो पहले से ही उसकी चूत को चोदने के लिए मरा जा रहा था।
मन उसका भी था लेकिन वो खुल नहीं रही थी।

मैंने कहा- करीना… अगर तुम ये सोच रही हो कि मैं तुम्हारा कुछ गलत फायदा उठाऊंगा तो ये सोचना बेकार है, मैं ऐसा इन्सान नहीं हूं। और अगर तुम ये सोच रही हो कि कहीं कुछ गड़बड़ हो जाएगी तो ऐसा भी मत सोचो, मुझ पर विश्वास करो, मैं कुछ गलत नहीं होने दूंगा।

वो मेरे लंड को सहलाती रही मगर उसने कुछ जवाब नहीं दिया।

फिर मैंने अपने शॉर्ट्स को नीचे कर दिया और लंड को बाहर निकाल लिया।
मैंने अपने गर्म लंड पर उसका हाथ रखवा दिया और उसने मेरे सीने में सिर को छुपा लिया मगर लंड पर से हाथ भी नहीं हटाया।

मैंने सोच लिया था कि ये अपने से नहीं बोलेगी, मुझे ही आगे बढ़कर इसकी शर्म को खोलना होगा।

उसकी मस्त गोरी गोरी चूचियों को हल्के हल्के दबाते हुए मैं उसके मटर के दाने जैसे निप्पलों पर जीभ फिराने लगा।

अब उसके बदन में कुछ हलचल होने लगी।

मैंने उसकी निप्पल को मुंह में भर लिया और उसको ऐसे पीने लगा जैसे छोटा बच्चा दूध पीता है।
बारी बारी से मैंने दोनों निप्पलों को चूसना शुरू कर दिया।

उसके बदन से जो परफ्यूम की खुशबू आ रही थी वो मुझे और ज्यादा उसको चूसने-काटने पर मजबूर किए जा रही थी।
इसलिए उसकी हल्की कसमसाहट के साथ उसकी चूचियों को जोर जोर से पीने के लिए मैं बाध्य होता जा रहा था।

अब उसकी सांसें तेज होने लगीं।
चूसते चूसते उसकी चूचियां अब धीरे धीरे लाल होने लगी थीं।
अब करीना के मुंह से आह्ह … आईई … स्स्स … धीरे … आह्ह … धीरे … जैसे कामुक और हल्के दर्द भरे शब्द बाहर आने लगे थे।

वो धीरे धीरे अब गर्म होती जा रही थी।
मैंने लगभग पांच-सात मिनट तक लगातार उसके बोबों को पीया और फिर मैं उसके पेट पर चूमने लगा।

उसके गोरे, कोमल, मखमली पेट पर जब भी मेरे होंठों को चुम्बन पड़ता तो वो सिहर जाती और उस सिहरने का साथ उसके पेट में नाभि के पास जोर की कंपकंपी हो उठती।

चूमते हुए मैं उसकी जीन्स के हुक पास जा पहुंचा। मैंने उसकी जीन्स को खोलना चाहा तो उसने मेरे हाथ को रोक लिया।
मैंने कहा- क्या हुआ?
वो बोली- नीचे नहीं।

मैं बोला- मगर मैं कुछ करूंगा नहीं … तुम्हें भरोसा नहीं है क्या मुझ पर? बोलो ? तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत करूंगा? मैं तो बस देखना चाहता हूं कि जिस लड़की से मैं प्यार करता हूं उसकी (चूत) दिखती कैसी है।

उसने दो पल के लिए मेरी तरसती आंखों में देखा और फिर अपना हाथ अपनी जीन्स की चेन पर से हटा लिया।
मैंने उसकी जीन्स के हुक को खोला और चेन नीचे खींच दी।

फिर उसकी पैंट को हल्का सा खोलकर देखा नीचे से उसने हल्की गुलाबी पैंटी पहनी थी और उसकी चूत पर वो पैंटी बिल्कुल टाइट फिट थी।
मैंने धीरे से उसकी पैंट को घुटनों से नीचे तक कर दिया।

अब उसकी गोरी गोरी जांघों के बीच में वो हल्की गुलाबी पैंटी उसकी कमसिन चूत पर पर्दा डाले हुए थी जिसको देखने के विचार से ही मेरे मुंह में पानी आ रहा था।

इतनी कमसिन लड़की की कमसिन सी चूत देखने और चाटने के ख्याल से ही मेरा मुंह लार से भर आया था।
मैंने टपकती लार के साथ उसकी पैंटी को धीरे से नीचे किया और उसकी हल्के बालों वाली कमसिन सी चूत मेरे सामने बेपर्दा होती चली गयी।

उसकी पैंटी को मैंने नीचे तक कर दिया और करीना अपने चेहरे को अपने हाथों से छिपाने लगी।
अब मैंने उसकी जीन्स को पूरा निकाल दिया और उसकी पैंटी को भी पूरा नीचे तक खींच दिया।

उसने अपने चेहरे को दोनों हाथों से ढका हुआ था।
मेरी जान  अब … मेरे सामने नंगी हो चुकी थी।

मैं उसकी टांगों के बीच में आकर बैठ गया। फिर उनको मोड़कर अपनी जांघों पर रखा और खोलकर उसकी चूत को ध्यान से देखने लगा।

उसकी चूत की छत पर हल्के हल्के काले झांट थे और चूत बिल्कुल चिपकी हुई थी जैसे कि चीरा लगाया गया हो।
ऐसी प्यारी चूत देखकर मुझसे रुका न गया और मैंने उसकी चूत को सूंघने के लिए अपनी नाक उस पर अड़ा दी।

मैं अपनी नाक को उसकी चूत पर फिराने लगा।
उसके बदन की खुशबू और उसकी चूत की महक ने मुझे पागल कर दिया।
मैं तो उसके नशे में खोने लगे।

कब मेरी जीभ उसकी चूत पर चलने लगी मुझे तो खुद ही पता न लगा।
मैं उसकी चूत को चाटने लगा और रीना आह … आह्ह … अम्म … अह … अम्म … करके हल्की सिसकारियां लेने लगी।

मैंने उसकी टांगों को थोड़ा और खोला और अब उसकी चूत में जीभ से भेदन करने लगा।
काफी टाइट चूत थी और जीभ को अंदर बाहर होने में अच्छी खासी दिक्कत हो रही थी।

फिर भी जहां तक हो सका मैं उसकी नमकीन चूत में अंदर तक जीभ को चलाने की कोशिश करता रहा।
अब तक करीना की चूत से पानी रिसना शुरू हो गया था।

इतना स्वादिष्ट चूत रस था कि अगर उसको दिन रात भी चाटो तो मन न भरे।
मैं तो चाटता ही रहा उसकी चूत को, और उधर उसके बदन में वासना की आग भड़कने लगी।

उसकी चूचियां तनकर एकदम से नुकीली पहाड़ी चोटियों के जैसे खड़ी हो गई थीं।
मैंने दोनों उभारों को अपने दोनों हाथों में भरा और उनका मर्दन करने लगा।

अब नीचे से मेरी जीभ उसकी चूत में चल रही थी और ऊपर से मेरे हाथ उसके मम्मों को दबा रहे थे, कस-कसकर भींच रहे थे।

करीना की हालत अब खराब होने लगी।
मैंने सोचा कि ये सही मौका है गर्म लोहे पर वार करने लगा।

मैंने हाथ चूचियों से हटाकर अपने बचे हुए कपड़े उतार दिये मगर चूत में जीभ देना जारी रखा।

अब मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को पीने लगा।
मेरा लंड उसकी चूत पर बार बार रगड़ मारने लगा।

मैं भी जानबूझकर इस तरह से उसके बदन पर अपने बदन को रगड़ रहा था जिससे कि मेरा लंड उसकी चूत की मालिश करता रहे।

मैंने देखा कि करीना बहुत गर्म हो चुकी थी।
मैं अब जो भी उसके साथ हरकत कर रहा था वो उसमें भरपूर मेरा साथ दे रही थी।

मैंने कहा- जान … डाल दूं क्या?
उसने कुछ जवाब नहीं दिया।

मैंने फिर पूछा- जान …प्लीज… बताओ ना … डाल दूं क्या अंदर … बहुत मन कर रहा है … मैं रह नहीं पाऊंगा तुम्हारे बिना … तुम्हारे प्यार में पागल हो चुका हूं … प्लीज मेरे प्यार को अपना लो … जान।

उसने मेरी आंखों में देखा और मेरे होंठों को चूमने लगी, फिर नीचे से खुद उसने हाथ ले जाकर मेरे लंड को अपनी चूत पर सेट करवा दिया और मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया।

मैं उसका इशारा समझ गया था, मैं बोला- रुको एक सेकेण्ड!
मैंने जल्दी से अपनी अलमारी से कॉन्डम निकाला और फटाक से पहन कर दोबारा उसके ऊपर आ लेटा।

अब मैंने उसकी चूत पर लंड को सेट किया और धीरे से धक्का लगाया।
वो उचकी और मुझे हटाने लगी।
मैं बोला- बस दो ही मिनट का दर्द है, एक बार तुम सह ले गई तो फिर मजा ही मजा है।

उसके बाद वो थोड़ी सहज हुई और मैंने फिर से लंड को सेट करके एक जोर का धक्का मारा तो लंड उसकी चूत में घुस गया।
वो छटपटाने लगी लेकिन मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

मैं तब तक उसके होंठों को पीता रहा जब तक कि खुद उसने दोबारा से मेरी पीठ को सहलाना न शुरू कर दिया।

अब धीरे धीरे मैंने नजाकत को भांपते हुए उसकी चूत में लंड को आधे से ज्यादा उतार दिया।

लंड डालकर मैं कुछ देर रुका रहा और उसके होंठों और चूचियों को चूमता रहा।

अब मैंने उसके बदन से बदन को चिपकाए हुए ही धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया।

उसे दर्द तो रहा था लेकिन वो बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी।
फिर होते होते लंड ने चूत में जगह बना ली।

मेरा लंड भी औसत ही है मगर स्टेमिना बहुत है।
मैं करीना की चुदाई करने लगा।

कुछ ही देर में उसको भी मजा आने लगा और दोनों एक दूसरे से लिपटकर एक दूसरे को चूमने लगे और चुदाई का मजा लेने लगी।

करीना अब खुद ही अपनी चूत को आराम से मेरी ओर धकेलते हुए चुदवा रही थी।
लगभग 20 मिनट तक मैंने उसको चोदा और फिर मैं स्खलित हो गया।

भले ही वीर्य कॉन्डम में निकला लेकिन तृप्ति ऐसी मिली कि जिसका कोई वर्णन नहीं। उसके कोमल बदन को चूमते हुए उसको चोदने के ख्याल ही वीर्य निकलवाने के लिए काफी थे।

कुछ देर हम दोनों लिपटे रहे और फिर मैंने लंड को बाहर लाकर कंडोम उतार कर फेंक दिया।

उसकी चूत अब थोड़ी खुली खुली लग रही थी।

उसने अपनी चूत को ध्यान से देखा और फिर मेरी ओर देखकर शर्माने लगी और मेरे गले से लिपट गई।

हम दोनों फिर नंगे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे। वो मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी रही और मैं उसकी कमर को सहलाता रहा।

उसकी शर्म अब खुल गई थी।
मैं भी फूला नहीं समा रहा था कि ऐसी कमसिन लड़की को चोदने का मौका मिला है और वो भी इतनी टाइट चूत वाली लड़की की चुदाई करने का मौका!

खैर, लेटे लेटे हम दोनों में फिर से भावनाएं जागीं और एक दूसरे को चूमने लगे।

हम दोनों फिर 10 मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे। मेरा मन एक बार और उसकी चूत मारने का था लेकिन उसकी चूत में दर्द हो रहा था और घरवालों का भी डर था इसलिए उसने मना कर दिया।

फिर वो कपड़े पहन कर धीरे से मेरे रूम से निकल गई।

उस दिन के बाद से तो मैंने उसको न जाने कितनी बार चोदा, उसको लंड का माल पिलाया, उसकी गांड चोदी और न जाने क्या क्या किया।

तो दोस्तो, आपको मेरी सच्ची स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।
मुझे कमेंट्स और ईमेल में अपनी प्रतिक्रियाएं भेजें।


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सोमवार, 13 सितंबर 2021

मकान मालिक की कमसिन लड़की को चोदा -1

 

नमस्कार मित्रो, मेरा नाम अमित है. मैं भोपाल का रहने वाला हूं. मेरा कद 5 फुट 8 इंच है और मेरे लिंग का साइज सामान्य है.

मगर मेरा लंड लम्बी रेस का घोड़ा है और किसी भी महिला को पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है.

ये मेरे जीवन की पहली और बिल्कुल सच्ची कहानी है.

यह एक कुंवारी जवान लड़की के साथ मेरे सेक्स की कहानी है.


हुआ यूं कि मैंने भोपाल में नौकरी के लिए एक निजी कम्पनी में आवेदन किया था, जिसमें मुझको साक्षात्कार के लिए बुलाया गया.

मैं गया और नसीब से मेरा चयन उस प्राइवेट कंपनी में हो गया.


मैं पहली बार अपने घर वालों से दूर भोपाल आकर रहने लगा था.

यहां पर मैंने एक कमरा किराये पर लिया था और जरूरत का कुछ सामान भी खरीद लिया था.


मैंने जिस घर में कमरा किराये से लिया था, उस मकान में एक परिवार और किराये से रहता था.

वो जो परिवार था, उसमें पति पत्नि और उनका एक 18 साल का बेटा था और एक 19 साल की बेटी थी.

यह घटना मेरी और उनकी लड़की के बीच की है. उस का नाम करीना है।


करीना के पिता प्राइवेट कंपनी में काम करते थे. वो सुबह 9 बजे जाते थे और शाम को 7 बजे आते थे.

करीना की मां की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए वो अधिकतर समय सोई रहती थीं और ज्यादा किसी से बात नहीं करती थीं.


करीना का भाई स्कूल में पढ़ता था और करीना घऱ पर ही रहकर प्राइवेट पढ़ाई करती थी.

मैं करीना के बारे बता दूं. उस का कद 5 फुट, रंग गोरा और उसके शरीर साइज बहुत ही कयामती था.

उसके बड़े बड़े दूध, पतली सी कमर … और गांड का साइज बड़ा मस्त था. उसकी गांड एकदम उठी हुई थी.


मैं भोपाल नया नया आया था और ज्यादा किसी से जान पहचान भी नहीं थी इसलिए ऑफिस से आने के बाद में पूरा समय घर पर ही रहता था.


वैसे तो सारी सुविधाएं अपने अपने रूम थीं, लेकिन पीने का पानी करीना के रूम के पास में आता था.

इसलिए जब भी पानी आता, तो पानी के बहाने मैं करीना के दर्शन भी कर आता.

पर उससे बात करने की मेरी हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि मैं थोड़ा शर्मीला स्वभाव का हूँ.

इसलिए अपना काम करता और वापिस आ जाता.

ये सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा.

फिर अचानक से मेरे ऑफिस का एक कर्मचारी कुछ काम से अपने गांव चला गया तो ऑफिस के अधिकारी ने मेरी ड्यूटी का समय बदल दिया.

ड्यूटी बदल जाने से मुझको कोई परेशानी नहीं थी.


लेकिन जब पानी आना होता था … उसी टाइम मेरा ऑफिस होता था … इसलिए मैंने थोड़ी हिम्मत करके करीना से बात की.


मैंने उससे बोला- मेरी ड्यूटी का टाइम चेंज हो गया है … क्या आप मेरी एक बाल्टी पानी की भर दिया करेंगी!

तो उसने बहुत ही प्यार से हां बोल दिया.


मैं उसको बाल्टी देकर ऑफिस आ गया.


रात को जब मैं घर पहुंचा, तो बाल्टी भरी हुई मेरे रूम के सामने रखी हुई थी. मैंने मन ही मन उसको धन्यवाद बोला.

इस तरह कुछ दिनों यूं ही चलता रहा.


कुछ ही दिनों में सर्दी का मौसम आ गया.

मैं छुट्टी वाले दिन अपनी छत पर धूप सेंक रहा था.


थोड़ी देर बाद वह भी छत पर कपड़े सुखाने आई.

मेरी उससे नजरें मिलीं, मैंने उसको गुड मॉर्निंग बोला और रोज मेरा पानी भरने के लिए धन्यवाद भी कहा.

वो मुस्कुरा दी.

इस तरह पहली बार कुछ बात हुई.

मैंने बात आगे बढ़ाते हुए उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम बताया.


उसने मुझसे मेरे बारे में पूछा. इस तरह हमारी बात थोड़ी थोड़ी होना चालू हो गई.


अब जब भी हम कभी एक दूसरे को मिलते, तो थोड़ी हाय हैलो हो जाती … लेकिन ज्यादा बात नहीं होती थी.


दस बाद दिन वह छत पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी.

मैं भी छत पर पहुंचा.


वो कुछ गणित के सवाल हल नहीं कर पा रही थी.

मैं पढ़ाई में शुरू से ही होशियार हूँ और गणित तो मेरा मनपसन्द विषय है.


मैंने करीना से पूछा- क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकता हूँ?

तो उसने हां मैं सर हिला दिया.


मैंने एक मिनट में सवाल हल कर दिया.

वो मेरा चेहरा देखती ही रह गई.


उस ने बताया कि मेरा गणित अच्छी नहीं है. मैं कल से परेशान हो रही थी.

उसने मुझको धन्यवाद बोला.


मैंने कहा- मेरा गणित बहुत अच्छी है, तुमको जब भी कोई दिक्कत हो. कुछ पूछना हो तो बेहिचक पूछ लिया करो, किसी तरह का संकोच मत करना.


इस तरह से हमारी बात अब थोड़ी ज्यादा होने लगी.

उसको जब भी कोई सवाल समझ में नहीं आता, वो आकर मुझसे पूछ लेती.


एक दिन मैं अपने ऑफिस से घर आया, तो वो गेट पर ही मेरा इंतजार कर रही थी.


मुझको आता देख कर करीना बोली- क्या आप अभी मुझको अभी एक सवाल समझा सकते हैं, मेरा कोचिंग में टेस्ट है आज!

मैंने तुरंत ही हां कर दिया.


मुझसे सवाल समझ कर वो बिना कुछ कहे जल्दी ही चली गई.


शाम को मैं छत पर टहल रहा था तो वो भी छत पर आ गई और उसने मुझे धन्यवाद बोला.


मैंने पूछा- तुम बिना कुछ कहे क्यों चली गई थीं?

उसने बताया- मैं अपनी क्लास के लिए लेट ही रही थी और मैं आपके आने का इंतजार कर रही थी.


मैंने उसको बोला- अगर तुमको कोई भी दिक्कत हो, तो मुझसे मोबाइल पर पूछ लिया करो. मुझको कोई परेशानी नहीं है.


थोड़ी देर सोचने के बाद उसने मेरा नम्बर मांगा, मैंने दे दिया.

तो उसने अपने मोबाइल में मेरा नम्बर सेव कर लिया और अपने नम्बर मिसकॉल करके दे दिया.


इस तरह से हमने अपने नम्बर एक दूसरे को शेयर किए.

उसको जब भी कोई परेशानी होती, वो कॉल कर लेती या मुझको मैसेज कर देती.


इस तरह हमारी बात रोज ही होने लगी थी.

लेकिन अभी ये बात सिर्फ पढ़ाई के विषय में ही होती थी. इसके अलावा और कोई बात नहीं होती.


एक रात को मैं अपने बिस्तर में लेटा हुआ था, तभी रीना का मैसेज आया.


उसमें लिखा हुआ था- सो गए क्या … क्या कर रहे हो?


पहले कभी हमारी और कोई बात नहीं हुई थी … इसलिए मुझको इस तरह का मैसेज देख कर थोड़ा अजीब लगा.


मैंने जब रिप्लाई दिया- जाग रहा हूँ, बोलो!

तो उसने कहा- कल मेरा एग्जाम है और मुझको कुछ दिक्कत हो रही है … वो क्लियर करने के लिए क्या आप अभी मेरे घर आकर मुझे कुछ समझा सकते हैं?


मैं थोड़ी देर बाद उसके घर गया, तो घर में सब लोग थे.

उसने अपने घरवालों को मेरे बारे मैं पहले ही बता दिया था इसलिए मुझको कोई परेशानी नहीं हुई.


मैंने उसको उस रात 12 बजे तक पढ़ाया, इसके बाद मैं अपने घर आकर सो गया.


इसके बाद अगले दस दिनों तक उसका न कोई मैसेज आया और न ही कॉल आया.


दस दिनों के बाद उसका मैसेज आया, जिसमें लिखा हुआ था ‘कैसे हो?’

मैंने जानबूझकर कोई जबाब नहीं दिया और मैं अनदेखा करने की कोशिश करने लगा.


एक दिन रविवार के छुट्टी थी तो मैं छत पर कपड़े सुखाने गया हुआ था.


तभी मेरे पीछे करीना भी आ गई और मुझसे बोली- आप तो बहुत बहुत बिजी हो … न रिप्लाई करते हो … न दिखाई देते हो?

मैंने भी उखड़े हुए मन से बोल दिया- तुम ही कभी मैसेज नहीं करती हो, जब तक तुमको काम न हो.


करीना बोलने लगी कि मेरे एग्जाम थे इसलिए आपको मैसेज नहीं किया.

उसने सॉरी भी बोला.


मैंने भी ‘ठीक है, कोई बात नहीं …’ बोलकर बात खत्म कर दी.


रात को सोते समय उसका मैसेज आया, जिसमें फिर से सॉरी लिखा हुआ था.


मैंने ‘इट्स ओके …’ लिख कर रिप्लाई कर दिया.

उसने मुझको गुड नाईट बोला और मैंने भी उसको गुड नाईट बोल दिया.

फिर मैं सो गया.


सुबह सोकर उठा तो करीना के 4 मिस कॉल पड़े हुए थे.


मैंने रिप्लाई किया तो उसने बताया- मेरे बाथरूम में पानी नहीं आ रहा है, तो क्या हम लोग आपका बाथरूम यूज़ कर सकते हैं?

इस पर मैंने हामी भर दी.


अब करीना के परिवार वाले एक एक करके मेरे घर आए और सभी नहा धोकर चले गए.

अंत में करीना नहा कर चली गई.


जब मैं नहाने बाथरूम में गया तो देखा कि वहां उस के कपड़े पड़े हुए थे.

उनमें ब्रा और पैंटी भी थी.


मैंने ब्रा को हाथ में लेकर देखा, तो उस पर 28 का साइज टैग लगा हुआ था और उसकी ब्रा में से बहुत ही भीनी भीनी खुशबू आ रही थी.

मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने नहाते समय मुठ मारकर सारा माल उसकी ब्रा में गिरा दिया.


फिर उसकी ब्रा को धोकर वहीं रख दिया, ताकि उसको शक न हो.


शाम को उसका मैसेज आया, जिसमें थैंक्यू लिखा हुआ था.

मैंने भी वेलकम लिख कर रिप्लाई कर दिया.


इस तरह रोज हमारी थोड़ी थोड़ी बात होने लगी.


लेकिन जब भी रीना मेरे सामने आती, मैं बस उसके बूब्स को देखता रहता.

अब सुबह दोपहर शाम रात पूरे दिन हम फोन पर मैसेज में बात करते रहते.

दोनों की पसंद ना पसंद सभी तरह की बातें होने लगी थीं.


एक दिन मैंने उससे उसके ब्वॉयफ्रेंड के बारे में पूछा तो उसने मना कर दिया कि कोई नहीं है.

उसने मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा, तो मैंने भी मना कर दिया.


इस तरह हमारी बहुत सारी बातें होने लगीं.


एक दिन मैंने मैसेज में उसको ‘आई लव यू …’ लिख कर सेंड कर दिया.

जिसको पढ़कर वो गुस्सा हो गई और दोबारा मुझसे ऐसी बात न करने को बोला.


मैंने भी उस दिन के बाद से उसको मैसेज करना बंद कर दिया.

करीना का मैसेज आता तो मैंने रिप्लाई देना भी बंद कर दिया.


उसने मुझको कई बार मैसेज किया लेकिन मैंने उसके मैसेज को कोई जबाब नहीं दिया.


एक दिन मैं ऑफिस से घर आया तो वो गेट पर ही खड़ी हुई थी.

जैसे ही मैं अन्दर आया तो बोलने लगी- बात क्यों नहीं कर रहे हो?

मैंने जबाब दिया- मैं अपना रूम शिफ़्ट करने वाला हूँ … इसलिए टाइम नहीं मिला.


यह बोलकर मैं अपने कमरे मैं आ गया थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल मैं मैसज आया- लकी मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ … क्या तुम छत पर आ सकते हो?


मैं कपड़े बदल कर छत पर पहुंच गया.

वहां पर रीना मेरा इंतजार कर रही थी.


वो मुझसे रूम चेंज करने का कारण पूछने लगी.

तो मैंने उसे ठीक ठाक जवाब नहीं दिया और वहां से नीचे अपने कमरे में आ गया.


थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल में दोबारा मैसेज आया जिसमें लिखा हुआ था ‘प्लीज रूम चेंज मत करो.’

तो मैंने रिप्लाई किया- जब तुम मुझको पसंद ही नहीं करती हो, तो ऐसा क्यों बोल रही हो?


करीना का जवाब था कि वो भी मुझको पसंद करती है, लेकिन उसको थोड़ा टाइम चाहिए.

मैंने ओके लिख कर रिप्लाई दे दिया और अपने काम में लग गया.


अगले दिन मैं छत पर घूम रहा था तो करीना भी मेरे पास आ गई.


सर्दियों के दिन थे … तो कोई ज्यादा लोग छत पर नहीं थे.

मैंने अच्छा मौका देखकर उसका हाथ पकड़ लिया.


उसका हाथ बहुत ही कोमल था.

जब मैंने उसका हाथ पकड़ा तो मेरे अन्दर रोमांच भर गया और मेरा लंड खड़ा हो गया.


मैंने इसके पहले मैंने किसी लड़की का हाथ ऐसे नहीं पकड़ा था.


वो कुछ देर तक तो अपना हाथ मेरे हाथ में दिए रही फिर ‘कोई देख लेगा ..’ बोलकर नीचे चली गई.


उस दिन रात को मैंने करीना के नाम की दो बार मुठ मारी और रात को मेरी और करीना की मैसेज पर बहुत सारी बातें हुईं.


अब हमारी बातें धीरे धीरे सेक्स की तरफ भी होने लगीं.


एक दिन मैसेज पर मेरी उस से बात हो रही थी.

तभी मैंने करीना से गले मिलने के लिए बोल दिया.


पहले तो उसने मना किया लेकिन मेरे मनाने पर मान गई.


लेकिन हम दोनों को गले मिलने के लिए कोई जगह नहीं थी तो मैंने उसको अपने कमरे में ही आने के लिए बोला.


उसने कहा- मौका मिलेगा, तो मैसेज करूंगी.


थोड़ी देर बाद करीना का मैसेज आया. जिसमें लिखा हुआ था- अपने रूम का गेट खोलकर रखो … मैं आ रही हूँ.


मैंने कमरे का दरवाज़ा खोला.


दो मिनट बाद करीना मेरे सामने खड़ी हुई थी वो तैयार होकर आई हुई थी.


जब वो रूम में आई, तो मैं उसको देखता ही रह गया.


उसने लाल कलर का टॉप और जींस पहनी हुई थी. टॉप में उसकी बड़ी बड़ी चूचियां साफ नजर आ रही थीं.

उसके बदन से परफ्यूम की बहुत अच्छी महक आ रही थी, जिससे मेरी मादकता और बढ़ गई.


मैंने उसकी तरफ अपनी बाँहें फैला दीं और वो कटी डाल की तरह मेरी बांहों में समा गई.


मैंने उसकी चूचियों की सख्ती को अपने सीने पर महसूस करना शुरू कर दिया. मेरा लंड खड़ा होने लगा था.


मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे तो वो भी मेरे होंठों को चूमने लगी.


दस मिनट बाद मैंने कहा- मुझे दूध पीना है.

वो बोली- तो पी लो.


मैंने उसकी चूची दबाई तो वो हंसने लगी और बोली- इनमें अभी दूध नहीं आता.

मैंने कहा- चैक करने दो न!


वो चुप हो गई तो मैंने उसके टॉप को उतार दिया और उसकी ब्रा में कैद चूचियों को देख कर एकदम से बौरा गया.


मैंने ब्रा को सरका कर एक निप्पल अपने होंठों में दबा लिया और चूसने लगा.

वो भी सीई सीई करके मेरे सर को अपने मम्मों पर दबाने लगी.


कुछ देर बाद हम दोनों बिस्तर में लेट गए और एक दूसरे के शरीर से खेलने लगे.


मैंने उससे कहा- क्या मुझे अपनी जवानी से खेलने दोगी?

वो बोली- खेल तो रहे हो.


मैंने कहा- अभी तो ऊपर ऊपर से खेल रहा हूँ, अन्दर डालने दो न.

वो इठला कर बोली- क्या?


मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया और कहा- ये.

वो बोली- धत्त … अभी ये सब नहीं.


मैंने कहा- अच्छा तो देख तो लो.

वो वासना से मेरी आंखों में देखने लगी और उसने मेरे लंड पर हाथ रख दिया.


मैंने पूछा- कैसा है?

वो बोली- मोटा.


मैंने कहा- मुँह में लोगी?

उसने छी: कह कर मना कर दिया.


इसी तरह से कुछ देर बाद मैंने उसे पूरी नंगी होने को कहा.

तो वो सोचने लगी.

मैंने कहा- तुम चाहती हो तो मेरा साथ दो … वरना कोई जबरदस्ती नहीं है.


वो मेरी आंखों में देखने लगी.

इतना कहकर में मुंह फेरकर लेट गया ....


बाकी की कहानी में अगले भाग में लेकर जल्दी ही आऊंगा और अगले भाग में ही मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने उस नाजुक हसीना को चोदा....


अगर आपको ये कहानी पसंद आती है तो कमेंट में जरूर बताइए इससे हमें अच्छी और सच्ची कहानियां लाने में help मिलती है और प्रोत्साहन मिलता है।🙏

मकान मालिक की कमसिन लड़की को चोदा -2

पड़ोस वाली भाभी को चोदने का सपना ऐसे हुआ पूरा -1

शुक्रवार, 15 मई 2020

पड़ोस वाली भाभी को चोदने का सपना ऐसे हुआ पूरा-3


मैं- "भाभी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं, मैंने जबसे आपको देखा है मैं आपका दीवाना हो गया हूं, मैं आपकी जवानी और सुंदरता का पूरा दर्शन करना चाहता हूं भाभी, बदले में आप जो बोलोगी करूंगा, प्लीज एक बार मुझे अपनी जवानी और सुंदरता के दर्शन करवा दो।"

भाभी -" अच्छा जी, मैं जो बोलूंगी वो करोगे तब तो आपको दिखाना ही पड़ेगा, लेकिन सिर्फ देखने मिलेगा कुछ करने की कोशिश मत करना"

भाभी के मुंह पर एक शैतानी मुस्कान थी।

मैने हां में सर हिला दिया।

अब मैं सोफे पर बैठ गया और भाभी सामने खड़ी हो गई।
 अब भाभी ने अपने गाउन के बटन खोलने शुरू कर दिए। उनके सफेद दुधिया बूब्स आधे दिखने लगे, भाभी ने ब्लैक ब्रा पहनी हुई थी।

अब भाभी ने अपने गाउन को पूरा खोल दिया और झटके से उनका गोरा बदन नंगा हो गया। मेरी आंखे फटी की फटी रह गईं। दोस्तों भाभी ब्लैक ब्रा और नीली पैंटी में कयामत लग रही थी। उसकी लम्बी भरी हुई टांगे बेहद सेक्सी लग रही थी।

ऊपर ब्लैक ब्रा में भरे हुए दूध जैसे किसी अप्सरा का एहसास करा रहे थे।

मेरा लन्ड बाहर निकल आया जो पैंट के ऊपर से साफ दिख रहा था।


भाभी ये देखकर हंस पड़ी।

भाभी -" अमित देखते ही रहोगे या कुछ बोलोगे भी, कैसी लग रही हूं मैं।"

मैं -" भाभी आप कयामत लग रही हो, क्या मैं आपको छू सकता हूं।"?

भाभी - " ठीक है छूना बस , कुछ करने नहीं मिलेगा।"

मैं -" मैं आपको बेडरूम में ले जाकर जी भरके देखना चाहता हूं, इतना कहकर मैंने उनको गोद में उठा लिया।"

ये इतना अचानक हुआ कि भाभी को कुछ समझ नहीं आया, वो कुछ बोल नहीं पाई। मैने उन्हे ले जाकर बेडरूम में बिस्तर पर पटक दिया।


और उनके पैरों के पास बैठ गया।
मैने उनके पैरों से उनको चूमना शुरू कर दिया, वो सकपका गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।

मैं पैरों को चूमते हुए जांघो को चाटना शुरु कर दिया, भाभी के मुंह से आंहे निकलने लगी। जैसे ही मैं जांघों के ऊपर पहुंचा भाभी ने रोक लिया, भाभी ने कहा नहीं अमित सिर्फ देखने की बात हुई थी ना, मैनें उनका हाथ हटाते हुए कहा भाभी अब तो मैं आपकी जवानी का पूरा मज़ा लूंगा, बाद में आपको जो सज़ा देनी हो दे देना।

इतना कहकर मैंने उनकी उभरी हुई फुली चूत पर पैन्टी के ऊपर से ही किस कर दी। भाभी चीख उठी, अब मैने उनकी पैंटी को नीचे खींच दिया, भाभी ने अपनी कमर थोड़ी ऊपर करके मुझे हेल्प किया, एक ही झटके में भाभी की पैन्टी की कैद से उनकी उभरी हुई फुली गोरी चिकनी चूत को आजाद कर दिया।

अब भाभी नीचे से नंगी पड़ी थी, उनकी लंबी टांगे बेहद गोरी चिकनी चमक रही थीं, उनकी भरी हुई जांघे बेहद सेक्सी लग रही थी। उनकी टांगों के बीच उभरी हुई फुली गोरी चिकनी चूत डबल रोटी जैसी किसी को भी पागल बना सकती थी, मेरे लन्ड का हाल बेहाल था ये देखकर,।

भाभी की चूत देखकर तो जैसे मैं बिल्कुल पागल सा हो गया, मैने उनकी टांगों को फैला कर उनकी प्यारी सी चूत पर अपना मुंह लगा दिया और चूमने चाटने लगा, अब भाभी की भी आवाजें आने लगीं थीं।

भाभी -" ओह ह ह ह ह ह आ अ मि त...... मज़ा आ रहा है मेरे रा जा.... ये मेरे लिए आज तक किसी ने नहीं किया था.... आह्ह्हह्ह

भाभी का पानी निकल गया था, मैने चाट कर साफ़ कर दिया।

अब भाभी से रहा नहीं जा रहा था।

भाभी -"अमित अब मत तड़पाओ जल्दी से अपना लन्ड मेरी प्यासी चू त में डालकर मेरी प्यास बुझा दो प्लीज।

मैं -" क्यों भाभी प्यासी क्यों भैया नहीं बुझाते क्या,मेंने हंसते हुए कहा।"

भाभी - " नहीं , तेरे भैया आजकल इतने बिजी है कि कुछ हो नहीं पाता।

मैं-" चिंता मत करो भाभी में हूं ना,आज आपकी ऐसी प्यास बुझाऊगा कि मज़ा आ जाएगा,।"

इतना कहकर मैने अपना लन्ड उनकी चूत के छेद पर रख दिया , यकीन मानो दोस्तो भाभी की चूत किसी कुंवारी लड़की के जैसे बिल्कुल टाईट थी।

मेंने एक झटका लगाया और मेरा पूरा  लौड़ा भाभी की गोरी चिकनी मस्त चूत के अंदर दाखिल हो गया।

भाभी की चीख नि कल गई.... आ ई ई ई ई मा मर गई

मेंने अपने मुंह से उनके मुंह को भाभी के नरम नाज़ुक गुलाबी होंठो को दबा दिया। और चूसना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद भाभी बोली अमित अब शुरू करो प्लीज...

मेंने ये सुनकर धीरे धीरे झटके लगाने शुरू कर दिया ....

भाभी भी मज़े से गान्ड उठा उठा कर चुदवा रहीं थीं। पूरे कमरे में फचा फच की आवाज़ आने लगी।

भाभी -" चोदो मेरे राजा आज से पहले इतना मज़ा कभी नहीं आया।"

ये सुनकर मुझे और जोश आने लगा और मैने चुदाई की स्पीड और बढ़ा दी । भाभी भी मज़े ले लेकर उछल उछल कर चुदवा रही थी।


में कमर हिला हिला कर गोरी चिकनी जांघों के बीच से भाभी की मस्त जवानी को लूट रहा था और चोद रहा था साथ में उनके गोल मटोल चूचियों को भी दबाता और चूसता जाए रहा था।

लगभग तीस मिनट बाद में झड़ गया और भाभी के ऊपर ही लेट गया।

इसके बावजूद मैने अलग अलग पोजिशन में कई बार चुदाई की। अगर आपको कहानी पसंद आती है तो लाइक शेयर और फॉलो कर दीजिए।

और आगे की कहानी सुननी हो तो कमेंट के बताइए में आगे की कहानी अगले भाग में बताऊंगा।

सोमवार, 12 अगस्त 2019

पड़ोस वाली भाभी को चोदने का सपना ऐसे हुआ पूरा-2

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अमित है और मै यूपी के कानपुर शहर से हूं। मेरी उम्र २७ साल है। आज इस ब्लॉग के माध्यम से मै आपके सामने अपनी सच्ची कहानी का भाग २ बताने जा रहा हूं। दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी है, उम्मीद है आप को पसंद आएगी। आइए कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
   
     तो दोस्तों मै परेशान था कि भाभी आजकल मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हैं, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरी परेशानी दूर हो गई और मुझे मेरा पहला प्यार मिल गया पूरी तरह से।
हुआ यूं कि उस दिन मै अपने कमरे में भाभी के नाम की मुठ मारकर उदास बैठा था तभी मम्मी की आवाज़ आई।

मम्मी-"अमित रचना बीमार है और रवि बाहर है, उसका फोन आया है,जा बेटा भाभी को डॉक्टर को दिखा ला।"

मेरी तो जैसे मन्नत पूरी हो गई थी। मै जल्दी से तैयार हुआ और भाभी के पास जाने के लिए निकल गया। बाहर देखा तो बहुत तेज़ पानी गिर रहा था।

मै पानी में से ही भाभी के घर पहुंच गया, मै थोड़ा सा गीला हो गया था। वहां पहुंचा तो भाभी ने दरवाज़ा खोला और बोली अरे अमित तुम तो बिल्कुल गीले हो गए हो।

रुको मैं टॉवेल लाती हूं।
मैने पूछा आप तो बीमार थी ना चलिए डाक्टर को दिखा दू आपको।

भाभी-" नहीं अब मै थोड़ी ठीक हूं, तुम आ गए हो अब मै बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी।"

अब मैने गौर किया भाभी पर, वो कयामत लग रही थी दोस्तों।
उनका गोरा बदन, लाल गाउन में और प्यारा लग रहा था।
गाउन का गला बड़ा था जिसमें से उनके बड़े बड़े गोल बूब्स की दरार  बिल्कुल साफ दिख रही थी। उनके लंबे पैर और कसा हुआ गाउन उनको और सेक्सी बना रहा था। ऊपर से उभरी हुई गान्ड साफ नज़र आ रही थी जो मुझे अनायास ही बेचैन करने लगी। मै उनको देखने में इतना खो गया कि पता ही नहीं चला कि भाभी मुझे ही देख रही थी।

भाभी-" अमित, अभी जी भरके देख लेना बाबू, पहले टॉवेल से पोंछ लो, सर्दी हो जाएगी।"

भाभी के मुंह से बाबू सुनकर तो जैसे मुझे नशा सा हो गया। मुझे कुछ होश नहीं था। तभी भाभी ने खुद मुझसे टॉवेल लेकर मेरा सर पोंछना शुरू कर दिया। अब भाभी मेरे बिल्कुल पास में खड़ी थी। उनके शरीर की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी।

तभी भाभी ने पूछा- "अमित मुझे पता है कि तुम मुझे बहुत पसंद करते हो। मुझे छुप कर देखते हो, क्या चाहते हो तुम मुझसे?"
आज बीमारी का बहाना बनाकर मैने तुम्हे इसलिए बुलाया था क्यों कि मुझे तुमसे जानना है क्या है तुम्हारे मन में?

मै एकदम सकपका गया कि नई भाभी मेरे मन में कुछ ग़लत नहीं है।

भाभी-"देखो अमित डरो मत, मै बुरा नहीं मानूंगी, जो भी है मुझसे बता दो, मै किसी से कुछ नहीं बताऊंगी।"

इतना सुनकर मुझ में हिम्मत आयी और मैने कहा भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, जबसे आपको देखा है मुझे आपसे प्यार हो गया है, आपको देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

ये सुनकर भाभी जोर से हंस दी। और बोली बताओ अच्छा क्या क्या अच्छा लगता है मेरा तुमको।

मैं -"भाभी आपकी स्माइल, आप की आंखे, आपका..... रहने दो आप बुरा मान जाओगी।
इतना कहकर मै रुक गया।"

भाभी -"आगे बोलो... आज जो बोलना हो बोल दो, जैसे बोलना हो बस बोल दो, तुम्हे आज सब छूट है।"

मैं-"भाभी आपका फिगर , आप के पैर,आपकी कमर मुझे बहुत अच्छी लगती है..... बस इतना ही देखा है, अंदर कुछ देखा नहीं.... इतना कहकर मै मुस्कुरा दिया.....

भाभी- " अच्छा जी, अंदर तक देखना चाहते हो तुम मुझे?"
भाभी के चेहरे पर एक नॉटी मुस्कान छा गई।

मैं सकपका गया। फिर भी मैने शर्मा कर मुंह नीचे कर लिया।


भाभी -" मैं तो सोच रही थी कि तुम्हारी इक्छा आज पूरी कर दी जाए, लेकिन तुम शायद मुझ में इंटरेस्टेड नहीं हो।"
अगर होते तो मुझे मना रहे होते कुछ दिखाने के लिए।

इतना सुनकर मुझ में हिम्मत बढ़ गई अब मैने खुलकर बोलना शुरू कर दिया।

मैं- "भाभी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं, मैंने जबसे आपको देखा है मैं आपका दीवाना हो गया हूं, मैं आपकी जवानी और सुंदरता का पूरा दर्शन करना चाहता हूं भाभी, बदले में आप जो बोलोगी करूंगा, प्लीज एक बार मुझे अपनी जवानी और सुंदरता के दर्शन करवा दो।"

भाभी -" अच्छा जी, मैं जो बोलूंगी वो करोगे तब तो आपको दिखाना ही पड़ेगा, लेकिन सिर्फ देखने मिलेगा कुछ करने की कोशिश मत करना"

भाभी के मुंह पर एक शैतानी मुस्कान थी।

मैने हां में सर हिला दिया।

अब मैं सोफे पर बैठ गया और भाभी सामने खड़ी हो गई।


शेष अगले भाग में -



दोस्तों कहानी का तीसरा भाग लेकर जल्दी आऊंगा। आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि अगर कहानी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों से शेयर कीजिए और ऐसी सच्ची कहानी के लिए हमें फॉलो करें।

धन्यवाद

बुधवार, 7 अगस्त 2019

पड़ोस वाली भाभी को चोदने का सपना ऐसे हुआ पूरा-1

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अमित है और मै यूपी के कानपुर शहर से हूं। मेरी उम्र २७ साल है। आज इस ब्लॉग के माध्यम से मै आपके सामने अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं। दोस्तों ये मेरे पहले प्यार और पहली चुदाई की कहानी भी है। तो चलिए दोस्तों कहानी शुरू करते हैं।
दोस्तों बात उस समय की है जब मेरी उम्र १८ साल थी। मै देखने में सीधा लड़का था, दुबला , लंबा लेकिन स्मार्ट था, मेरी आदत थी कि मै सबसे जल्दी घुल मिल जाता था और मिलनसार था, हमारी कॉलोनी में आने का एक ही रास्ता था और मेरे बाजू वाला घर खाली था।बोर्ड एग्जाम के बाद मेरी छुट्टियां चल रही थी। मैने कई दिन पहले सुन रखा था कि बाजू वाला घर किराए पर चला गया है और जल्दी ही कोई वहां शिफ्ट होने वाला है।

एक दिन मै बाहर क्रिकेट खेल रहा था कि तभी एक टेम्पो सामान लेकर आया हम सब लड़के समझ गए कि नए किरायेदार आ गए हैं। हमने ध्यान नहीं दिया और खेलने लगे। तभी उसके पीछे से एक कार आकर रूकी हमारा खेलना बंद हो गया क्युकी सब उस कार को देख रहे थे।

तभी उसमें से उतरी लाल साड़ी में लिपटी हुई एक बेहद सुंदर औरत जो बला की खूबसूरत थी, वह एकदम गोरी, और चिकनी थी, स्किन पर गजब का ग्लो था। लंबे घने बाल और ऊपर से बड़ी बड़ी आंखें थी उसकी हाइट ५'८ थी और शरीर भरा हुआ, कमर पतली, लेकिन गान्ड और चूची बाहर निकले हुए थे। दोस्तों वह बिल्कुल अप्सरा दिख रही थी।

मेरी नजर उस पर से हट ही नहीं रही थी। ये मेरा पहला प्यार था। जो उसे देखते साथ हो गया था। मैने क्रिकेट छोड़कर दौड़ लगा कर घर पहुंच गया और मम्मी को बता दिया कि नए पड़ोसी आ गए हैं मिल लो उनसे।

मम्मी ने जाकर उनसे बात शुरू की उनको घर बुला लिया चाय पानी के लिए। घर पर उन्होंने बताया कि उनकी नई नवेली शादी हुई है और वो भैया का नाम रवि है और वो बैंक में काम करते हैं। जबकि भाभी का नाम रचना है और वो हाउस वाइफ हैं।

फिर शाम का खाना भी उन्होंने हमारे यहां खाया , और मै उन लोगों से काफी घुल मिल गया। बातों बातों में भैया ने बताया कि उनकी जॉब के काम से अक्सर उनको बाहर रहना पड़ता है तो हमारे रहने से उनको रचना की फिकर नहीं रहेगी।


अब मैं उनके घर आने जाने लगा , भाभी से खूब बात होने लगी, हंसी मजाक करने लगा। एक दिन भाभी ने मुझे बुलाया किसी काम से और बातों बातों में भाभी ने पूछा कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैने शरमा कर मना कर दिया। भाभी ने बोला तुम इतने हैंडसम हो तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।


मैने भी बोल दिया कि आपके जैसी सुंदर लड़की मिली ही नहीं। तो उन्होंने पूछा कि क्या मै सच में तुम्हे अच्छी लगती हूं?

मैने कहा भाभी आप बहुत सुंदर हो। उन्होंने कहा लेकिन तुम्हारे भैया को तो मै अच्छी नहीं लगती।
मैने हिम्मत करके बोल दिया कि भाभी आप मेरा क्रश हो जबसे आपको देखा है आपका दीवाना हो गया हूं कसम से।


ये सुनकर भाभी शरमा सी गई और अंदर चली गई। मै भी बापस लौट आया। फिर कुछ दिन भाभी ने मुझसे बात नहीं की मै बेचैन सा हो रहा था।


शेष अगले भाग में-


दोस्तों कहानी का दूसरा भाग लेकर जल्दी आऊंगा। आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि अगर कहानी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों से शेयर कीजिए और ऐसी सच्ची कहानी के लिए हमें फॉलो करें।

धन्यवाद

बुधवार, 31 जुलाई 2019

मेरी चुदाई की कहानी अंजान बूढ़े से - सत्या भाग ३

दोस्तो, मेरा नाम सत्या है, आपको अपनी सच्ची कहानी बता रही हूं, दोस्तों पिछ्ले दो भागों में मैने बताया था कि केसे मजबूरी के चलते मै एक बूढ़े के सामने नंगी पड़ी थी, और अब वह मेरी जवानी को लूटने जा रहा था। ये इस कहानी का तीसरा और आखिरी भाग है। उम्मीद है आप इसे भी उतना ही प्यार देंगे। आइए कहानी शुरू करते हैं-

अब वह उठा और मेरे ऊपर आ गया, मेरी टांगो को फैला कर उसने अपना बूढ़ा लंड मेरी चूत के छेद पर रख दिया। मै तो जैसे पागल हो गई। उसने अचानक एक झटके से अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दिया।


मेरी चीख निकल गई..... आ आ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ मां मर गई.... आंखो से आंसू निकल रहे थे मेरी।


मैने हाथ से देखा कि कितना अंदर गया लेकिन में सनन रह गई अभी भी बूढ़े का आधा लंड बाहर था। मै और डर गई।

लेकिन बूढ़े ने मेरे मुंह से अपना मुंह लगा दिया और चूमने लगा,उसके मुंह से गंदी बदबू आ रही थी लेकिन अभी मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर स्मूच करने के बाद उसने बोला कि अब ठीक है?

मैने हां में सर हिला दिया। उसने कहा अब मै पूरा डालने जा रहा हूं तू तैयार है बेटा। पहली बार उसने मुझे बेटा कहकर प्यार से पूछा था। मैने हां कर दिया।

तभी उसने एक और जोरदार झटका मारा और इस बार ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में किसीने गर्म रॉड डाल दी हो। मेरी फिर चीख निकल पड़ी-

आ आ आ। ऊ ऊ ऊ ऊ मां ...... मर गई .... छोड़ दो मुझे प्लीज.... निकालो इसे बाहर....


उसने पक्के खिलाड़ी के जैसे फिर से मेरे मुंह से अपना मुंह लगा दिया और रुक गया।इस बार वह मेरे गोल मटोल दूध पी रहा था। थोड़ी देर में मुझे चूत के अंदर लंड का एहसास अच्छा लगने लगा। और अब मैं मज़ा लेने लगी।


अब उसने धीरे धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया। एक दो बार के बाद अब मुझे अच्छा लगने लगा। मेरी टांगे दोनों फैली हुई थी और उसके ऊपर थी।

और वह मज़े से मुझे चोद रहा था। और मैं एक गंदे से बूढ़े आदमी से मज़े ले लेकर चुद रही थी।
लगभग २० मिनट बाद वह झड़ गया। मै इस बीच दो बार झड़ चुकी थी।


वह एकदम थककर निढाल होकर मेरे बाजू में लेट गया। और मै भी आनंद में डूबी हुई उसके बाजू में दूसरे तरफ मुंह करके लेट गई। बाहर अभी तक बारिश ओर तूफान चल रहा था।


थोड़ी देर में मुझे पीछे फिर उसका स्पर्श महसूस हुआ, मैने देखा तो वह मेरे पीछे से आकर मुझसे चिपक रहा था।


अब उसने अपने दोनों हाथ मेरे दोनों गोल मटोल दूध पर रख दिए और उनको दबाने लगा। मेरा हाथ अपने आप उसके बूढ़े लंड पर पहुंच गया।
कुछ ही देर में वह एकदम खड़ा हो गया।



बूढ़ा बोला चल अब खड़ी हो जा और घोड़ी बन जा अब पीछे से डालूंगा।


मै बिल्कुल आज्ञाकारी बच्ची की तरह उठकर घोड़ी बनकर खड़ी हो गई। वह उठा और पीछे से जाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। और इस बार मुझे दर्द भी नहीं हुआ।

फिर उसने मुझे ४० मिनट तक चोदा।


अब मेरीशर्म गायब हो गई थी। और मै भी मज़े ले रही थी। मैने पूछा दादा कब से नहीं किया था ।

उसने बताया कि २० साल से उसने किसी के साथ नहीं किया था, और मेरे जैसी सुंदर लड़की और इतनी मुलायम चूत तो उसे पहली बार मिली थी।

अब झड़ने के बाद  उसने मुझे चाय के लिए पूछा मैने हा बोल दिया वह चाय बनाने लगा और मै नंगी ही चारपाई पर लेट कर बारिश बंद ना हो जाये ये सोच रही थी क्यूंकि अभी मेरे पास समय था घर पहुंचने का और मै एक दो बार और चुदना चाहती थी।


चाय पीने के बाद मैने खुद उसको लिटाकर उसका लंड अपने हाथ में लेकर उसे खिलाना शुरू कर दिया और खड़ा करने के बाद उसको बोला चोदने को तो उसने कहा अब उसकी कमर में दर्द है वह नहीं कर पाएगा।

मैने उसको लिटा कर उसके उपर बैठकर खुद ही चुदाई चालू कर दी। और पहली बार एक अंजान से अपनी जिंदगी की पहली और सबसे मस्त चुदाई का आनंद लिया।


कुछ देर बाद बारिश रुक गई और मै कपड़े पहनकर अपने घर चल दी। बूढ़े ने बताया था कि वह अब अपने बेटे के पास दूसरे गांव में चला जाएगा दुकान बंद करके।


मै आज भी उस सड़क से निकलती हूं तो उस बूढ़े की याद आ जाती है। पता नहीं कहा है । पर हां उसने मुझे इतना मज़ा दिया जिसको मै काभी भी भूल नहीं सकती।

तो दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी थी। आपको कैसी लगी मुझे बताइए कमेंट में। और अपने दोस्तों से शेयर कीजिए। हमारे ब्लॉग को फ़ॉलो करिए। आपकी भी कोई कहानी हो तो हमें भेज दीजिए हम उसे अपने ब्लॉग पर अपलोड करेंगे।

धन्यवाद

रविवार, 28 जुलाई 2019

मेरी चुदाई एक अनजान बूढ़े से - सत्या भाग १

हैलो दोस्तों, मेरा नाम सत्या है और आज मैं आपके सामने अपनी सच्ची कहानी बताने जा रही हूं। जो अंजाने में हुई थी लेकिन मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी यादों में से एक है। तो चलिए दोस्तों कहानी शुरू करते हैं। दोस्तों अभी मेरी उम्र ३५ साल है और में शादी शुदा औरत हूं। मेरी हाइट ५'४ है।

दोस्तों बात उस समय की है जब मै १९ साल की थी, और मेरी जवानी अपने चरम पर थी। मेरा रंग एकदम गोरा और स्किन चिकनी थी, मेरे बूब्स का साइज ३२ था और मेरे बूब्स बिल्कुल गोल चिकने और चमकदार थे, मेरी कमर पतली और गान्ड उभरी हुई थी जिसके कारण वह एकदम अलग से नज़र आती थी। मेरा चेहरा एकदम श्रद्धा कपूर की तरह दिखता था, मेरे कॉलेज में सब मुझे श्रद्धा कपूर कहते थे। लगभग हर कोई मुझपर गंदी नज़र रखता था, और में सिर्फ इसका मज़ा लेती थी लेकिन चुदाई के बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता था, और मैं इस बारे में सोचती भी नहीं थी।अभी तक मैने किसी भी लड़के को अपनी जवानी और चूत को छूने भी नहीं दिया था, लेकिन एक दिन बिना कुछ सोचे ही मेरी जवानी लूट ली गई, और वो भी एक बूढ़े आदमी के द्वारा।
दोस्तों मेरा कॉलेज मेरे गांव से १२ किलोमीटर दूर था और मै स्कूटी से जाती थी। मेरे साथ मेरी एक सहेली भी जाती थी लेकिन उस दिन वह कॉलेज नहीं गई थी। और मौसम खराब होने के कारण मुझे भी जल्दी घर पहुंचना था। इसलिए मै १२ बजे ही कॉलेज से निकल गई ताकि बारिश के पहले अपने घर पहुंच जाऊं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रास्ते में तेज बारिश और तूफान शुरू हो गया। में पूरी भीग गई थी लेकिन मै गाड़ी चलाती रही क्यूकी रास्ते में जंगली एरिया था वहां मुश्किल से कोई घर थे। अब तूफान इतना बढ़ गया कि स्कूटी चलाना मुश्किल हो गया। तभी सामने मुझे एक चाय की दुकान दिखी मैने अपनी स्कूटी खड़ी कर दी और दुकान के अंदर चली गई। उसके अलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। अंदर मैने देखा कि दुकान पर कोई नहीं था, वहां एक छोटा सा चाय का स्टॉल था और अंदर एक कमरा था वो भी कच्चा था,पानी और तूफान अंदर तक आ रहा था, तभी अंदर से आवाज़ आई-"यहां अंदर आ जाओ बेटी वहां भीग जाओगी।"

बुजुर्ग की आवाज़ सुनकर मुझे लगा कि चलो बेटी कहा है और बुजुर्ग आदमी है, ये सोचकर मै अंदर चली गई। अंदर एक चारपाई थी बस उसपर वो आदमी लेटा हुआ था। उसकी उम्र लगभग ६५ साल थी और चेहरे पर सफेद दाढ़ी थी, उसने बनियान और सफेद धोती पहन रखी थी। बैठने के लिए कुछ और नहीं था तो उसने मुझे इशारा किया कि यहीं चारपाई पर बैठ जाओ। मै बैठ गई। अब में उसकी कमर के पास बैठी थी और वह मेरी तरफ मुंह करके लेटा था, मै बाहर देख रही थी कि कब पानी रुके और मैं जाऊं, लेकिन तूफान और पानी दोनों बहुत तेज़ थे, अंधेरा सा छा गया था दिन में, ऊपर से मै पूरी गीली थी, मेरा सूट मेरे शरीर se चिपक गया था, काले सूट में मेरी गोरी चिकनी चमड़ी और भी चमकदार दिख रही थी। हमारे बीच कोई बात नही हुई थी अभी तक।
मै अपने ख़यालो में खोई हुई थी कि कैसे घर जाऊंगी अब। ऊपर से मेरा फोन भी स्कूटी की डिक्की में था।
    तभी मुझे अपनी कमर के पास कुछ महसूस हुआ, मै एकदम सकपका गई, ध्यान दिया तो देखा कि बूढ़ा आदमी मेरे पास खिसक आया था और उसका कमर वाला हिस्सा मुझसे टच हो रहा था। थोड़ी ही देर में उसका लंड मुझे गड़ने लगा। शायद मेरे स्पर्श से उसका लंड खड़ा होने लगा था। अभी में कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं थी। मैने उस पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन इस बार मुझे अचानक जोर से करेंट सा लगा क्युकी उसका हाथ मेरी गीली जांघ पर था। मै बिल्कुल स्थिर हो गई। शायद इसकी हिम्मत इसीलिए बढ़ रही थी क्युकी मै कुछ भी नहीं कर रही थी। तभी उसने एक और कदम बढ़ा दिया मेरी जवानी को लूटने के लिए। इस बार उसने अपने दोनों हाथों को मेरी कमर के पास से डालकर मुझसे चिपकने लगा । वो अभी भी लेटा हुआ था और मुझे उसका लंड अपनी कमर के पास महसूस हो रहा था।
मेरे लिए यह अनुभव पहली बार था तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। अब उसकी हिम्मत और बढ़ गई और अब वह उठकर बैठ गया।

अब वह मेरे पीछे से दोनों पैर दोनों तरफ डालकर बैठ गया, अब उसके दोनों हाथ मेरे दोनों गोल चूची पर थे और उसका सीना मेरी पीठ से चिपका हुआ था, उसने अपना मुंह मेरे कान के पास लगाकर चाटना और चूमना शुरू कर दिया।


मुझे अब मज़ा आने लगा था। पहली बार कोई मेरे दूध दबा रहा था और मुझे चूम रहा था। मैने आंखे बंद कर ली और मदहोशी में खोने लगी। तभी उसने मुझे उठाया और अपनी गोद में बिठा लिया और अपने पैर नीचे लटका कर बैठ गया अब में उसकी गोद में थी और मेरा एक हाथ उसके गले में था और उसका मुंह मेरी चूची के ऊपर था।

 अब उसने मुझे खड़ा किया और मेरा सूट उतारने कहा शरम के मारे मैने माना कर दिया लेकिन इस बार उसने गुस्से में कहा  -"कपड़े उतार मादरचोद"।

पहली बार किसीने मुझसे ऐसी बात की थी, मेरी आंखो से आंसू आ गए अब मै सोच रही थी कि कहा फस गई और अब क्या होगा।
उसने फिर चिल्लाया " कपड़े उतार ना रण्डी या मै फाड़ दू।"

शायद मेरी चुप्पी से उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और अब वह मुझे गंदी गालियां देकर बात करने लगा था।

तभी वह एकदम से खड़ा हो गया , उसने अपनी बनियान उतार दी। उसके सीने पर भी सफेद बाल थे। पहली बार एक आदमी आधा नंगा मेरे सामने खड़ा था। मै कुछ सोच पाती उससे पहले ही उसने अपनी धोती भी उतार दी।

मै एकदम स्तब्ध थी दोस्तों मै उसे देखती रह गई वह पूरा नंगा मेरे सामने खड़ा था। उसका लंड ७ इंच लम्बा झूल रहा था जैसे कोई काला सांप पेड़ से लटकता है। मुझे अचानक वह बूढ़ा बहुत अच्छा लगने लगा था।

वह आगे बढ़कर मुझ से पीछे से चिपक गया। अब मेरी उभरी हुई गान्ड पर उसका बूढ़ा लंड बहुत अच्छे से महसूस हो रहा था। उसके दोनों हाथ मेरे दोनों गोल चूची पर थे और वह मुझे बेतहाशा चूम रहा था गले में और कान के पास । अब उसने मेरा सूट उतारना शुरू किया। मैने बिना किसी विरोध के हाथ उठा दिए और उसने आराम से मेरा गीला सूट उतार दिया। अब मै काली ब्रा और काले पजामे में उसके सामने आधी नंगी खड़ थी।


मेरा गोरा बदन गीला था जिसके कारण और भी ज्यादा चमकदार और आकर्षक लग रही थी। मेरे गोल कसे हुए मम्मे एकदम सुंदर लग रहे थे। मै जिसे चोदने की इच्छा मेरे पूरे रिश्तेदरों और कॉलेज की थी, वो लड़की आज एक अनजान बूढ़े के सामने आधी नंगी खड़ी थी। और उसकी किस्मत देखो गंदा सा बूढ़ा आदमी इतनी हसीन कमसिन लड़की को चूम रहा था।

शेष अगले भाग में-


दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी है अभी मुझे काम है तो इसका अगला भाग शाम को लिखूंगी की किस तरह मेरी मदमस्त जवानी को एक अनजान बूढ़े ने लुटा। अगर आपको कहानी पसंद आई हो तो प्लीज मुझे फ़ॉलो करें और इस कहानी को शेयर करें। और कमेंट में मुझे बताइए क्या लगा आपको।
धन्यवाद

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

मेरी चुदाई की कहानी भाग २

नमस्कार दोस्तों, मै राज अपनी सच्ची कहानी का दूसरा भाग लेकर आया हूं, दोस्तों पिछ्ले भाग में मैने आपको बताया था कि कैसे मैं अपनी गर्लफ्रंड रोशनी को मिलने कार से गया और बारिश के कारण मैने कार साइड में लगाकर उसको किस करनी शुरू कर दी थी।मेरा एक हाथ उसकी चूचियों पर था और वह सिसकारी लेती हुई मदहोश होती जा रही थी। मैने दूसरे हाथ से उसकी जीन्स की जिप खोल दी।
        जीन्स खुलते ही दोस्तो उसकी नीली चड्डी दिखने लगी।में बता नहीं सकता दोस्तो कितनी सेक्सी लग रही थी वह, क्युकी वह एकदम गोरी थी ऊपर से नीली पैंटी उसपर और अच्छी लग रही थी। अब मैने उसकी जीन्स उतार दी अब एक गोरी भरी हुई लड़की सिर्फ नीली पैंटी में मेरे सामने थी। उसकी जांघें चमक रही थी, अब मैने उसकी जांघों को चूमना शुरू कर दिया। उसने आंखें बन्द कर लीं। धीरे धीरे मैने उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से किस करना शुरू कर दिया।अब बारी थी उसकी नाज़ुक, सुंदर , उभरी हुई, फुली सी चूत को पैंटी की कैद से आजाद करने का। तो अब मैने उसकी पैंटी भी उतार दी। दोस्तो उसकी चूत एकदम चिकनी, गोरी, डबल रोटी जैसे थी। उसको देखकर में बिलकुल पागल सा हो गया।
         अब मैने उसकी टांगो को थोड़ा फैलाया और अपने होंठ उस प्यारी सी, फुली हुई चूत पर रख दिए, उसने जोर से सिसकारी मारी। मैने चूत के दाने को जीभ से चाटना शुरू कर दीया। वह पागल सी होने लगी, उसने अपने नाखून मेरे बालों में घुसाने शुरू कर दिए।
      मै उसको बोलता जा रहा था रोशनी कितनी प्यारी चूत है यार तुम्हारी, इतनी मीठी चूत मुझसे छुपाकर रखी थी तुमने।

वह शर्म और मज़े के कारण कुछ बोल नहीं रही थी। बस सिसकारी ले रही थी। अब उसकी प्यारी सी चूत ने पानी छोड़ दिया था। गीली चूत में मैने अपनी एक उंगली डाल दी। वह चिल्ला पड़ी। अब उंगली मैने अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। उसको दर्द के साथ अब मज़ा आने लगा। अब वह गान्ड उठाकर उंगली डालने का मज़ा ले रही थी। कुछ देर में मैने दूसरी उंगली को उस प्यारी फुली हुई चूत के अंदर डाल दिया। अब रोशनी आनंद के आसमान पर थी।


शेष अगले भाग में-


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