बुधवार, 31 जुलाई 2019

मेरी चुदाई की कहानी अंजान बूढ़े से - सत्या भाग ३

दोस्तो, मेरा नाम सत्या है, आपको अपनी सच्ची कहानी बता रही हूं, दोस्तों पिछ्ले दो भागों में मैने बताया था कि केसे मजबूरी के चलते मै एक बूढ़े के सामने नंगी पड़ी थी, और अब वह मेरी जवानी को लूटने जा रहा था। ये इस कहानी का तीसरा और आखिरी भाग है। उम्मीद है आप इसे भी उतना ही प्यार देंगे। आइए कहानी शुरू करते हैं-

अब वह उठा और मेरे ऊपर आ गया, मेरी टांगो को फैला कर उसने अपना बूढ़ा लंड मेरी चूत के छेद पर रख दिया। मै तो जैसे पागल हो गई। उसने अचानक एक झटके से अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दिया।


मेरी चीख निकल गई..... आ आ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ मां मर गई.... आंखो से आंसू निकल रहे थे मेरी।


मैने हाथ से देखा कि कितना अंदर गया लेकिन में सनन रह गई अभी भी बूढ़े का आधा लंड बाहर था। मै और डर गई।

लेकिन बूढ़े ने मेरे मुंह से अपना मुंह लगा दिया और चूमने लगा,उसके मुंह से गंदी बदबू आ रही थी लेकिन अभी मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर स्मूच करने के बाद उसने बोला कि अब ठीक है?

मैने हां में सर हिला दिया। उसने कहा अब मै पूरा डालने जा रहा हूं तू तैयार है बेटा। पहली बार उसने मुझे बेटा कहकर प्यार से पूछा था। मैने हां कर दिया।

तभी उसने एक और जोरदार झटका मारा और इस बार ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में किसीने गर्म रॉड डाल दी हो। मेरी फिर चीख निकल पड़ी-

आ आ आ। ऊ ऊ ऊ ऊ मां ...... मर गई .... छोड़ दो मुझे प्लीज.... निकालो इसे बाहर....


उसने पक्के खिलाड़ी के जैसे फिर से मेरे मुंह से अपना मुंह लगा दिया और रुक गया।इस बार वह मेरे गोल मटोल दूध पी रहा था। थोड़ी देर में मुझे चूत के अंदर लंड का एहसास अच्छा लगने लगा। और अब मैं मज़ा लेने लगी।


अब उसने धीरे धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया। एक दो बार के बाद अब मुझे अच्छा लगने लगा। मेरी टांगे दोनों फैली हुई थी और उसके ऊपर थी।

और वह मज़े से मुझे चोद रहा था। और मैं एक गंदे से बूढ़े आदमी से मज़े ले लेकर चुद रही थी।
लगभग २० मिनट बाद वह झड़ गया। मै इस बीच दो बार झड़ चुकी थी।


वह एकदम थककर निढाल होकर मेरे बाजू में लेट गया। और मै भी आनंद में डूबी हुई उसके बाजू में दूसरे तरफ मुंह करके लेट गई। बाहर अभी तक बारिश ओर तूफान चल रहा था।


थोड़ी देर में मुझे पीछे फिर उसका स्पर्श महसूस हुआ, मैने देखा तो वह मेरे पीछे से आकर मुझसे चिपक रहा था।


अब उसने अपने दोनों हाथ मेरे दोनों गोल मटोल दूध पर रख दिए और उनको दबाने लगा। मेरा हाथ अपने आप उसके बूढ़े लंड पर पहुंच गया।
कुछ ही देर में वह एकदम खड़ा हो गया।



बूढ़ा बोला चल अब खड़ी हो जा और घोड़ी बन जा अब पीछे से डालूंगा।


मै बिल्कुल आज्ञाकारी बच्ची की तरह उठकर घोड़ी बनकर खड़ी हो गई। वह उठा और पीछे से जाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। और इस बार मुझे दर्द भी नहीं हुआ।

फिर उसने मुझे ४० मिनट तक चोदा।


अब मेरीशर्म गायब हो गई थी। और मै भी मज़े ले रही थी। मैने पूछा दादा कब से नहीं किया था ।

उसने बताया कि २० साल से उसने किसी के साथ नहीं किया था, और मेरे जैसी सुंदर लड़की और इतनी मुलायम चूत तो उसे पहली बार मिली थी।

अब झड़ने के बाद  उसने मुझे चाय के लिए पूछा मैने हा बोल दिया वह चाय बनाने लगा और मै नंगी ही चारपाई पर लेट कर बारिश बंद ना हो जाये ये सोच रही थी क्यूंकि अभी मेरे पास समय था घर पहुंचने का और मै एक दो बार और चुदना चाहती थी।


चाय पीने के बाद मैने खुद उसको लिटाकर उसका लंड अपने हाथ में लेकर उसे खिलाना शुरू कर दिया और खड़ा करने के बाद उसको बोला चोदने को तो उसने कहा अब उसकी कमर में दर्द है वह नहीं कर पाएगा।

मैने उसको लिटा कर उसके उपर बैठकर खुद ही चुदाई चालू कर दी। और पहली बार एक अंजान से अपनी जिंदगी की पहली और सबसे मस्त चुदाई का आनंद लिया।


कुछ देर बाद बारिश रुक गई और मै कपड़े पहनकर अपने घर चल दी। बूढ़े ने बताया था कि वह अब अपने बेटे के पास दूसरे गांव में चला जाएगा दुकान बंद करके।


मै आज भी उस सड़क से निकलती हूं तो उस बूढ़े की याद आ जाती है। पता नहीं कहा है । पर हां उसने मुझे इतना मज़ा दिया जिसको मै काभी भी भूल नहीं सकती।

तो दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी थी। आपको कैसी लगी मुझे बताइए कमेंट में। और अपने दोस्तों से शेयर कीजिए। हमारे ब्लॉग को फ़ॉलो करिए। आपकी भी कोई कहानी हो तो हमें भेज दीजिए हम उसे अपने ब्लॉग पर अपलोड करेंगे।

धन्यवाद

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें